Jul 3, 2011

दो वर्ष

दो वर्ष
दो लोग
दो दिल
दो अरमान
दो प्यार
दो लकीरे
दो लबें
दो मन
दो अकाँछा

कई बार
मिले - बिछड़े
टूटे - जुड़े
गिरे - संभले
संभले - उठे
जिंदगी (से) लड़े
हारे – जीते
जीते - जीए
रुके - भागे
भागे - संभले

Jul 1, 2011

एहसास ये कैसा है

एहसास ये कैसा है
न छुड़ा पाए दामन जिनसे
ये प्यास कैसा है?

लकीरें टेढ़ी मेढ़ी सी इन हाथों
को मिला जाने का ये
जिद्द कैसा है?

लबों पर सजी उन एहसासों का
किसी और एहसासों से
न मिटा देने का ये
जिद्द कैसा है ?

महकती सांसों से सजी उन एहसासों का
किसी और सांसों से
न मिटा देने का ये
जिद्द कैसा है ?

उँगलियों का उँगलियों से लिपटे उन एहसासों का
किसी और से न
लिपटने देने का ये
जिद्द कैसा है ?

Jun 2, 2011

ख़ामोशी कितनी है खामोश तू



ख़ामोशी कितनी है खामोश
पर
है कौन तू,
है क्या तू  
समझा न क्यूँ
समझ पाया न क्यूँ

तू है तो
हलचल कहीं  
घुटन कहीं
लाचारी कहीं
व्यथा  कहीं
कथा कहीं
सख्त कहीं
सबल कहीं
निर्बल कहीं

न जाने क्यूँ खामोश
है ख़ामोशी हर कहीं

लपेट रखी हैं
अंतर्मन में तू
प्यार कहीं
इकरार कही
इंकार कहीं
इजहार कही
द्वन्द कहीं
उद्वंड कहीं