Feb 13, 2014

बदलाव...

किसी ने कहा था “हर पांच वर्षों में लोग बदल जाते हैं”. सोचा.... तो, बात कभी सही तो कभी गलत के पल्लों में झूलते पाया. पल्लों के धुरी में विश्वास रखता हूँ मैं....
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सूर्य को
उदय से अस्त होते
चन्द्रमा को
अनेक कलावों में रूप  
बदलते देखा है...

पतझड़ को
बसंत से गुजर
बरसात में भीगते
शरद के बाँहों में
सिमटते देखा है...

बचपन को
किशोर में बढ़ कर
जवानी में मदमस्त हो
बुढ़ापे से हिलते  हुए
शुन्य में ढलते देखा है...

ईर्ष्या को
संतोष से शांत होते
दुखों के उफान को
खुशियों में ढलते.
हंसते खिलखिलाते देखा है...

बदलाव गर
प्रकृति की नियम है
बदलाव के इस अनुराग में
प्रकृति को
कभी बदलते नहीं देखा है
  
गर,  बदल जाओ आज तुम कभी
गर,  बदल जाए सलूक काभी
गर,  बदल जाए परिवेश कहीं  
गर,  बदल जाए काल भी कभी
नहीं बदलेगा तुम से प्रेम कभी  
ना बुझेगा तुम्हारे प्रति तमक कभी    (तमक=PASSION)

प्रकृति की संतान हूँ और,
प्रकृति की देन हमरा प्रेम है,
प्रकृति की भेंट हो तुम,
हमारी ज़िन्दगी हो तुम
और बहुत प्यार है तुम से ...  


Love You Tonss… Happy Valentine’s Day..

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लिखना कभी मेरी चाहत न थी..कोशिश की कभी जुर्रत न थी
शब्दों के कुछ फेर की कोशिश ---यूं कोई सराह गया कि
लिखना अब हमारी लत बन गयी...
-------- दो शब्द ही सही,, आपके शब्द कोई और करिश्मा दिखा जाए--- Leave your comments please.