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Thursday, January 5, 2012

मेरे घर का एक कोना





मेरी  कुछ शब्द महीनों पहले जब लिखना  शुरू ही किया था .........




मेरे घर का एक कोना
वो कोना जहाँ उदास मन भी, बहार बन जाती है

वो कोना जहाँ सिरहाना है
वहीँ जहाँ कोई हर रात आती है..

हर पल की नींद चुराती है
नींद में  ख्वाब दिखाती है

ख्वाबों में अपने होने का एहसास दिलाती है
ऐसा लगता है कि वही है वो

कहीं है मेरे साथ
हर पल हर वक्त

आँखें देख तों नहीं पाती
पर एहसासों की महक कहती है
यहीं है , यहीं हैं..
एहसास तुम्हारे होने का
“अशांत” मन को “सोना” सा एहसास पाने का

2 comments:

लिखना कभी मेरी चाहत न थी..
कोशिश की कभी जुर्रत न थी
शब्दों के कुछ फेर की कोशिश
यूं कोई सराह गया की
लिखना अब हमारी लत बन गयी...
-------- दो शब्द ही सही आपके,
शब्द कोई और करिश्मा दिखा जाए--- Leave your comments please.